SEBI ला रहा है Brokers के लिए Device Binding नियम: क्या है Device Binding और निवेशकों पर इसका असर?

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SEBI new rules for brokers - भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों की सुरक्षा और फ्रॉड रोकने के लिए SEBI समय-समय पर नए नियम लाता रहता है। अब SEBI ने स्टॉक ब्रोकर्स को निर्देश दिया है कि वे अपने ट्रेडिंग ऐप में Device Binding सिस्टम लागू करें।


सरल शब्दों में, जैसे बैंकिंग ऐप या UPI ऐप केवल उसी मोबाइल में काम करता है जिसमें आपका रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर वाला सिम लगा होता है, उसी तरह अब ट्रेडिंग ऐप भी केवल उसी डिवाइस पर लॉगिन होगा जिसे पहले से वेरिफाई किया गया है। लेकिन बड़ा सवाल यह है —
1: क्या इससे बाजार में मैनिपुलेशन रुकेगा?
2: निवेशकों को फायदा होगा या नुकसान?
इस आर्टिकल में हम Device Binding को आसान भाषा में समझेंगे और इसकी ग्राउंड रियलिटी भी जानेंगे।


Device Binding क्या होता है? (What is Device Binding in Trading Apps)
Device Binding एक सिक्योरिटी सिस्टम है जिसमें आपका ट्रेडिंग अकाउंट किसी एक या सीमित डिवाइस से लिंक कर दिया जाता है।
जब आप पहली बार ट्रेडिंग ऐप में लॉगिन करते हैं, तो:

  • आपका मोबाइल नंबर OTP से वेरिफाई होता है
  • डिवाइस का IMEI / डिवाइस ID रिकॉर्ड होता है
  • वही डिवाइस “Trusted Device” बन जाता है


इसके बाद:
✔ उसी फोन से लॉगिन आसानी से होगा
❌ किसी दूसरे फोन में लॉगिन करने पर अतिरिक्त वेरिफिकेशन लगेगा
❌ कई मामलों में लॉगिन ब्लॉक भी हो सकता है
यह सिस्टम बैंकिंग ऐप और UPI में पहले से लागू है।


SEBI Device Binding क्यों लागू करना चाहता है?
SEBI का मुख्य उद्देश्य है:

1 - अनधिकृत लॉगिन रोकना

2- क्लाइंट अकाउंट हैकिंग रोकना पावर ऑफ अटॉर्नी का दुरुपयोग रोकना

3- ट्रेडिंग फ्रॉड कम करना

4- निवेशक सुरक्षा बढ़ाना

👉 कई मामलों में देखा गया है कि क्लाइंट को पता ही नहीं चलता और उसके अकाउंट से ट्रेड हो जाते हैं। Device Binding से ऐसा करना कठिन हो जाएगा।


क्या इससे Market Manipulation रुकेगा? (Ground Reality)

सिद्धांत रूप में यह नियम अच्छा लगता है, लेकिन ग्राउंड रियलिटी कुछ अलग है।


सच्चाई यह है:

👉 बड़े ऑपरेटर और मैनिपुलेटर के पास पहले से पूरा सिस्टम होता है
👉 वे सर्वर, API और एल्गो से ट्रेड करते हैं
👉 वे एक फोन पर निर्भर नहीं होते


इसलिए:

✔ छोटे स्तर का अनधिकृत लॉगिन (unauthorized login) रुकेगा
✔ अकाउंट हैकिंग कम हो सकती है
❌ संगठित मैनिपुलेशन पर असर बहुत कम होगा


मतलब —
रिटेल निवेशक को असुविधा ज्यादा, मैनिपुलेटर पर असर कम।


📱 Device Binding से निवेशकों को होने वाले नुकसान-
अब सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा — आम निवेशकों और छोटे बाजार प्रतिभागियों पर इसका क्या असर होगा।
1️⃣ फोन खो जाने पर ट्रेडिंग पूरी तरह बंद अभी तक क्या होता था:
✔ सिम ब्लॉक कराते थे
✔ नया सिम लेते थे
✔ 24 घंटे बाद OTP शुरू
✔ फिर ऐप लॉगिन लेकिन


Device Binding में:
❌ नया फोन = नया डिवाइस
❌ OTP के बिना लॉगिन नहीं
❌ SMS बंद = ट्रेडिंग बंद


👉 मतलब - आप अपना ट्रेडिंग अकाउंट एक्सेस ही नहीं कर पाएंगे।



2️⃣ परिवार के अकाउंट मैनेज करना मुश्किल

भारत में बहुत सामान्य है: पति पत्नी का अकाउंट संभालता है बेटा माता-पिता का अकाउंट संभालता है परिवार में एक ही व्यक्ति ट्रेडिंग करता है Device Binding के बाद:

❌ दूसरे फोन से लॉगिन मुश्किल

❌ मल्टी-डिवाइस मैनेजमेंट बंद

❌ फैमिली अकाउंट हैंडलिंग खत्म


3️⃣ छोटे अनुभवी ट्रेडर्स का मॉडल खत्म,

  • मार्केट में कई ऐसे अनुभवी लोग हैं: जो 10-20 क्लाइंट का पैसा संभालते हैं
  • PMS नहीं ले सकते
  • छोटा सेटअप है
  • भरोसे पर ट्रेड करते हैं


Device Binding के बाद:

दूसरे का अकाउंट लॉगिन नही

❌ क्लाइंट मैनेजमेंट असंभव

❌ यह पूरा सेगमेंट खत्म यह भारत के रियल मार्केट स्ट्रक्चर को नजरअंदाज करता है।


4️⃣ टेक्निकल समस्या = ट्रेडिंग जोखिम

कल्पना करें:

  • फोन खराब
  • ऐप क्रैश
  • सिम नेटवर्क डाउन
  • डिवाइस वेरिफिकेशन फेल


अब:

❌ पोजीशन एग्जिट नहीं

❌ स्टॉपलॉस नहीं

❌ लॉस बढ़ सकता है यह निवेशकों के लिए वास्तविक वित्तीय जोखिम है।


5️⃣ ग्रामीण और बुजुर्ग निवेशकों पर बड़ा असर

भारत में कई निवेशक:

खुद ट्रेडिंग नहीं करते बेटा/एजेंट/सलाहकार करते हैं फोन टेक्नोलॉजी में सहज नहीं Device Binding के बाद: ❌ दूसरों द्वारा संचालन कठिन


❌ डिजिटल बाधा बढ़ेगी

❌ निवेश भागीदारी घट सकती है



SEBI नियम का सकारात्मक पक्ष


संतुलन के लिए सकारात्मक पक्ष भी समझना जरूरी है। Device Binding से:

✔ अकाउंट हैकिंग कम होगी

✔ अनधिकृत ट्रेड कम होंगे

✔ OTP सुरक्षा मजबूत होगी

✔ डेटा सुरक्षा बेहतर होगी यह साइबर सुरक्षा के नजरिये से सही कदम है।



निष्कर्ष: अच्छा नियम, लेकिन भारतीय वास्तविकता से दूर

👉 SEBI का उद्देश्य सही है — निवेशक सुरक्षा।

लेकिन भारतीय शेयर बाजार की वास्तविकता अलग है:

  • फैमिली अकाउंट मैनेजमेंट छोटे
  • अनौपचारिक ट्रेडिंग मैनेजर
  • टेक्नोलॉजी सीमाएँ
  • डिवाइस निर्भरता


Device Binding से:

✔ छोटे फ्रॉड कम होंगे

✔ trading account security India बढ़ेगी

❌ मार्केट मैनिपुलेशन पर असर कम

❌ निवेशकों को असुविधा ज्यादा


इसलिए जरूरी है कि SEBI और ब्रोकर्स:

  • मल्टी-डिवाइस विकल्प दें
  • सुरक्षित फैमिली एक्सेस दें
  • आपातकालीन लॉगिन सिस्टम दें
  • डिवाइस बदलने की सरल प्रक्रिया दें


तभी यह नियम वास्तव में निवेशक हित में होगा।


इन्हे भी देखें -

SEBI Registered Brokers List

Open Free Demat Acount with Choice Broking


Last Update : Feb 13, 2026
Published : Feb 13, 2026
Auther : Saurabh Kumar Srivastava
Publisher : Lucknow Lions
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